Tuesday, May 3, 2011

अस्थमा की रोकथाम के लिए जागरूकता जरूरी : डा.तलवार

सिरसा,(थ्री स्टार): विश्व पटल पर अस्थमा ऐसे रोग का रूप धारण कर चुका है जो न सिर्फ करोड़ों लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है, अपितु इससे पीडि़त रोगियों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोत्तरी भी हो रही है। यह बात मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए शहर के वरिष्ठ चिकित्सक डा.एमएम तलवार व शिशु रोग विशेषज्ञ डा.आशीष खुराना ने कही। उनके साथ डा.दीपेश तलवार भी उपस्थित थे। वे शहर के आरसी होटल में अग्रणी दवा निर्माता कंपनी सिपला की ओर से अस्थमा दिवस पर आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अस्थमा रोग के प्रति जागरूकता का अभाव इसके उपचार में सबसे बड़ा बाधक है जिसके चलते यह रोग खतरनाक गति से बढ़ रहा है। अकेले भारत देश में ही 2 करोड़ से अधिक लोग अस्थमा व अन्य श्वास रोगों से पीडि़त है, जबकि विश्व भर में इनकी संख्या 6 करोड़ से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि सांस की बीमारियों को लेकर लोगों में विभिन्न प्रकार की धारणाएं विद्यमान है। यह सच है कि सांस की ही बीमारी अस्थमा नहीं होती, लेकिन सांस लेने में दिक्कत आना अथवा श्वास से संबंधित किसी भी प्रकार की एलर्जी आगे चलकर अस्थमा का रूप धारण कर सकती है। उन्होंने कहा कि शरीर के स्वस्थ रहने के लिए श्वास प्रक्रिया का नियमित व सही होना बेहद जरूरी है। देश में बढ़ते प्रदूषण व अनियमित खानपान से भी अस्थमा रोग से पीडि़त रोगियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है, वहीं इनहेलेशन थैरेपी द्वारा इसके सही उपचार के प्रति लोगों के मन में अनेक भ्रांतियां होना भी रोगियों की संख्या में वृद्धि का मुख्य कारण है। चिकित्सकों ने कहा कि अस्थमा या सांस से जुड़ी अन्य बीमारियों के इलाज के लिए इनहेलेशन थैरेपी सबसे सही उपचार है क्योंकि इसके जरिए दवा को सीधे फेफड़ों में पहुंचा पाना संभव हो पाता है। उन्होंने कहा कि अस्थमा रोग में मानव के फेफड़ों व सांस की नलियों में सूजन व सिकुडऩ आ जाती है। ऐसी स्थिति में उपचार के लिए सही मात्रा में दवा को सीधे फेफड़ों तक जल्द से जल्द पहुंचाना आवश्यक होता है जो सिर्फ इनहेलेशन पद्धति द्वारा ही संभव हो सकता है। बाल व शिशु रोग विशेषज्ञ डा.आशीष खुराना ने बच्चों में अस्थमा रोग के बढ़ते प्रभाव के संबंध में विस्तार से जानकारी दी तथा बताया कि माता-पिता के अस्थमा रोग से पीडि़त होने के कारण भी कई बार बच्चों में यह रोग आ जाता है क्योंकि कुछेक मामलों में यह रोग आनुवांशिकता की वजह से भी होता है। डा.दीपेश तलवार ने अस्थमा जांच के लिए उपयोग मशीनों ब्रीथोमीटर व स्पाइरोमीटर के संबंध में भी जानकारी दी। इस अवसर पर सिपला प्रतिनिधि राम सुनेजा, विशाल सिंगला, रवि मेहता, विकास भार्गव, प्रदीप कुमार, संदीप अरोड़ा भी उपस्थित थे।

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