Monday, May 2, 2011

अहिंसा, अनेकान्त, अपरिग्रह में धर्म : सुभद्र मुनि

सिरसा,(थ्री स्टार): सिरसा 2 मई - धर्म उत्कृष्ट मंगल है तथा जीवन में मंगल करने वाला है। धर्म से श्रेष्ठ कोई दूसरी चीज दुनिया में नहीं है। शाश्वत मंगल के लिए धर्म की शरण ह। ये उद्गार जैनाचार्य श्री सुभद्र मुनि जी महाराज ने जैन सभा के अन्तर्गत ठाकरी देवी जैन भवन के शिलान्यास समारोह में व्यक्त किए। आचार्य श्री ने कहा कि धर्म के अभाव में जीवन प्राणहीन है। धर्म, अहिंसा, अनेकान्त और अपरिग्रह भाव में निहित है। अत: प्राणीमात्र के प्रति हित भावना, विचारों में समन्वय के साथ-साथ सदा स्वार्थ एवं तृष्णा से रहित आचरण हो। जिस दिल में प्राणीमात्र के प्रति पे्रम, सहयोग और परोपकार की वृत्ति है वही मानवता की सच्ची पहचान है। स्वार्थ मानव को मानव से दूर करता है। परमार्थ एवं सद्पुरूषार्थ में अपनत्व है। आत्म-चिन्तन ही आत्म-दर्शन है। सत्य को समझने में भी समन्वय का मार्ग है। इस अवसर पर श्री नरेन्द्र मुनि, अमित मुनि, मुकेश मुनि, मुदित मुनि, संदीप मुनि, संघ प्रर्वितनी श्री सुशील कुमारी जी, साध्वी रत्न सुधी जी तथा साध्वी शुभिता जी ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर सभा के प्रधान प्रेम नाहटा, महामंत्री वेदप्रकाश जैन, ललित जैन, दलीप जैन सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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