Monday, April 18, 2011

राम भक्त हनुमान बल एवं ज्ञान के प्रतीक हैं: रघुबीर

सिरसा,(थ्री स्टार):अखिल भारतीय श्री राम-मुलख-दयाल योग प्रचार समिति के प्रधान योगाचार्य ध्यानयोगी गुरू रघुबीर जी महाराज ने हनुमान जयन्ती के सुअवसर पर दिव्य योग साधना मन्दिर कोटली में गत दिवस उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने सम्बोधन में फरमाया कि राम भक्त हनुमान बल एवं ज्ञान के प्रतीक हैं। हनुमान जी का वज्रतुल्य शरीर उनके शारीरिक बल का प्रतीक है। वे बल, बुद्धि एवं ज्ञान के दाता हैं। हनुमान जी के प्रति श्रद्धा एवं प्रेम रखने वाले के संकट व कष्ट नजदीक नहीं आते। कलियुग में हनुमान भक्ति अनिवार्य है। आज के भोग प्रधान युग में मनुष्य चिंतातुर, निर्बल व रोगी हो चुका है। अतुलित बल धामा हनुमान जी का ध्यान करने से मनुष्य के रोग नष्ट हो जाएंगे और अथाह बल का संचार होगा। रघुबीर महाराज ने आगे फरमाया कि राम जी ही हनुमान जी हैं और हनुमान जी ही राम जी हैंं। हनुमान जी को राम जी का ही रूप जानना चाहिए। हनुमान जी के शरीर रूपी मन्दिर में राम जी विराजमान हैं। राम जी और हनुमान जी दो जिस्म और एक जान हैं। राम जी की अथाह कृपा एवं दिव्य शक्ति का रूप ही हनुमान है। हनुमान जी लंका में विभीषण को बताते हैं कि मैं तो कपि चंचल हूं, मेरे दर्शन करने वाले को भोजन भी नसीब नहीं होता। राम जी की कृपा ने ही हनुमान जी को महान बलशाली एवं ज्ञानी बना दिया। रघुबीर महाराज ने बताया कि योगीराज देवी दयाल जी महाराज भी स्वयं हनुमान भक्त थे। इस मौके पर रघुबीर महाराज ने हनुमान आसन का भी प्रदर्शन किया और बताया कि इस आसन द्वारा शरीर में बल एवं शक्ति का विकास होता है और ब्रह्माचार्य व्रत में यह आसन सहयोगी रहेगा। इस मौके पर बहनों ने 'आओ खुशियां मनाइए, रल-मिल नचिए गाइए, हनुमान जी दा जन्मदिन मनाइएÓ नामक सुन्दर भजन गाकर सभी को भाव-विभोर कर दिया। इस पवित्र मौके पर प्रधान केवल कृष्ण ठकराल, आचार्य साधुराम, विष्णु शर्मा, पृथ्वी सिंह बैनीवाल, खेमचन्द, धर्मपाल, लछमण सिंह, बृजमोहन, चन्द्रकांत कागजी, जितेन्द्र, जीत सिंह, अरूण आदि भक्तगण मौजूद थे। अंत में सभी भक्तों में प्रसाद वितरित किया गया।

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