Monday, April 25, 2011

युवा जागृत है तभी सभ्य समाज का निर्माण

सिरसा,(थ्री स्टार): युवा उत्साह, उमंग एवं शक्ति का प्रतीक है लेकिन इसके साथ जीवन में विवेक का होना परम आवश्यक है। विवेक के अभाव में शक्ति के सदुपयोग की अपेक्षा उसका दुरूपयोग होना शुरू हो जाता है तथा इसी से जीवन का पतन आरम्भ हो जाता है। ये विचार जैनाचार्य श्री सुभद्र मुनि जी महाराज ने श्री महावीर नवयुवक संघ के तत्वावधान में आयोजित युवा सम्मेलन में व्यक्त किए। आचार्य श्री ने कहा कि यदि युवा जागृत और सजग हैं तो समाज और राष्ट्र सुरक्षित हैं। अनैतिकता, अश्लीलता और भ्रष्टाचार समाज में लम्बे समय तक नहीं टिक सकते। इन सब के पीछे असीमित इच्छाएं और तृष्णा की अधिकता है। अत: युवा वर्ग जीवन में उन्नति एवं प्रगति के लिए संयमित जीवन, समाज के प्रति कत्र्तव्य और राष्ट्र के लिए समर्पित भावना रखें। जो युवा अनैतिकता और हिंसा के माध्यम से प्रगति चाहते हैं वे कभी उपलब्धि नहीं पा सकते। युवा जागृत और समर्पित है तभी सभ्य समाज और अखण्ड राष्ट्र का निर्माण होगा। समाज युवा है तभी राष्ट्र गतिशील है। इस अवसर पर आचार्य श्री ने युवा वर्ग को नशे से बचने का संकल्प करवाया। उन्होंने बताया कि नशे से बुद्धि का ह्नास हो जाता है तथा जीवन, परिवार एवं समाज में अशांति का प्रादुर्भाव हो जाता है। आचार्य श्री ने कहा कि जीवन की तीन अवस्थाएं हैं बचपन, युवा और वार्धक्य। बाल अवस्था में ज्ञान का अभाव होता है, युवा अवस्था में कर्मठता, शक्ति और कुछ करने का जज्बा होता है जबकि वार्धक्य अवस्था में अनुभव होता है जबकि कर्मठता क्षीण हो जाती है लेकिन जो युवा स्वछंदता और मनमानी में जीवन नष्ट करते हैं वे उपलब्धियों से वंचित रह जाते हैं। कार्यक्रम में श्री अमित मुनि एवं श्री मुकेश मुनि ने भी अपने पवित्र विचार प्रस्तुत किए। इस अवसर पर ललित जैन, दलीप जैन, नवयुवक मण्डल के प्रधान नितिन जैन, मनीत जैन, आदीश, अंकित, आंचल, संजय, संभव, लक्की, रिंकु, जीवन जैन, वैभव जैन, दीपक, अरविन्द जैन सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित थे।

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