Wednesday, April 13, 2011

मन ही मनुष्य के बन्धन व मोक्ष का कारण है:रघुबीर

सिरसा,(थ्री स्टार): योग योगेश्वर रामलाल महाप्रभु जी के शुभ जन्मदिवस पर अखिल भारतीय श्री राम-मुलख-दयाल योग प्रचार समिति के प्रधान योगाचार्य ध्यानयोगी गुरू रघुबीर जी महाराज ने दिव्य योग साधना मन्दिर कोटली में रामनवमी के पावन दिन योग प्रेमियों को अपने सम्बोधन में फरमाया कि मन ही मनुष्य के बन्धन व मोक्ष का कारण है। यदि मन बाहरी सांसारिक विषयों अर्थात नारी एवं धन सम्पत्ति की ओर दौड़ता है। यही मनुष्य के बन्धन एवं जन्म-मरण का कारण है। इसके विपरीत मन यदि सतगुरू की कृपा से अंतर्मुखी होकर प्रभु से एक हो जाता है, ईश्वरीय प्रेम में खो जाता है ऐसा मन मोक्ष एवं परमगति का कारण है। जैसे पानी का स्वभाव है कि यह सदा नीचे की ओर जाता है वैसे ही मन का स्वभाव है कि यह सदैव बुराई की ओर जाता है। जैसे पानी की दिशा बदलने के लिए अर्थात पानी को ऊपर चढ़ाने के लिए मोटर का प्रयोग किया जाता है वैसे ही मन को ऊंचा चढ़ाने के लिए, बुराई के मार्ग से हटाने के लिए प्रभु चिंतन, प्रभु भजन व प्रभु ध्यान किया जाता है। सतगुरू की कृपा से मन अंतर्मुखी होकर ईश्वरीय आनन्द को प्राप्त होता है। सतगुरू की कृपा के बिना मन कभी भी ईश्वरीय भजन में नहीं लगता क्योंकि मन बहुत चंचल और बलवान है। इसको वश में करना इतना मुश्किल है जैसे वायु को वश में करना। मन को वश में किए बिना मुक्ति असंभव है। मन को वश में किए बिना परम आनन्द की प्राप्ति नहीं है। रघुबीर महाराज ने आगे फरमाया कि चंचल एवं पापी मन को अभ्यास एवं वैराग्य से वश में किया जा सकता है। मन बार-बार संसार की ओर दौड़ता है और बार-बार आप अभ्यास द्वारा इसे प्रभु ध्यान में लगाओ। मन के प्रभु ध्यान में लगने से मनुष्य का कल्याण होगा। प्रभु ध्यान के बिना मन निर्मल नहीं हो सकता। मन के निर्मल हुए बिना ईश्वर की प्राप्ति नहीं है। ईश्वर की प्राप्ति के बिना मोक्ष की प्राप्ति नहीं है। ईश्वर प्राप्ति सतगुरू की कृपा के बिना असंभव है। रघुबीर महाराज ने अंत में फरमाया कि ध्यान से ही मन वश में होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। हर रोज ध्यान लगाओ और जीवन का आनन्द पाओ। इस पवित्र मौके पर केवल कृष्ण ठकराल, जितेन्द्र चावला, विष्णु शर्मा, दर्शन सिंह, पृथ्वी सिंह बैनीवाल, जितेन्द्र, धर्मपाल, खेमचन्द, हनीष, रामप्रकाश मेहता, कृष्ण मेहता, सुरेश मेहता, नानक मिस्त्री व रामेश्वर बीरड़ा सहित अन्य भक्तजन मौजूद थे। अंत में सभी भक्तों में प्रसाद वितरित किया गया।

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